रविवार, 5 दिसंबर 2010

साधना है कला.... मण्डला के डॉ. अग्निहोत्री

साधना है कला....मण्डला के डॉ. अग्निहोत्री


कला साधना है, तपस्या है, जो परिश्रम और एकाग्रता से प्राप्त होती है। यह कहना है पेशे से चिकित्सक लेकिन अपनी कला के बल पर राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को प्रभावित कर चुके ७६ वर्षीय डॉ. एके अग्निहोत्री का। जिन्होंने चिकित्सक जैसे मानवीय एवं कठिन पेशे के साथ-साथ तूलिका और रंग के संग फुर्सत के पलों में अपनी मानवीय संवेदनाओं को कैनवास में एक मूर्तरूप प्रदान किया तथा उनकी यह रंगीन यात्रा आज भी जारी है।
चित्रकारी के अपने इस शौक का जिक्र करते हुए डॉ. अग्निहोत्री ने बताया कि मुझे चित्रकारी करने का शौक बचपन से ही था और खाली वक्त में मैं रंगों के संग ही अपना समय बिताया करता था, यह शौक कब मेरे दिल की गहराई में बसता चला गया, इसका मुझे एहसास ही नहीं हुआ। क्रेयान पाउडर से मैंने अपनी पहली पेंटिंग सन्‌ १९५६ में मोर की बनाई थी, जिसके बाद मेरी चित्रकारी को एक नई दिशा मिली और मैंने टाइगर हिल्स, मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी, हरिवंश राय बच्चन एवं अमिताभ बच्चन जैसी कई महान हस्तियों के चित्र अपने कैनवास में उकेरे। अपने सबसे यादगार पलों के बारे में बताते हुए डॉ. अग्निहोत्री ने बताया कि मुझे सबसे ज्यादा खुशी तब हुई थी जब ३ जून २००३ को राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति भवन में मुझे उन पर बनाये हुए पोट्रेट के लिये सम्मानित किया था और मेरी कला की तारीफ की थी।
१० दिन से २ साल तक
अपने चित्रों के विषय में जानकारी देते हुए डॉ. अग्निहोत्री ने बताया कि चित्रकारी धैर्यता से किया जाने वाला कार्य है और मुझे एक चित्र को बनाने में औसतन डे़ढ़ से दो साल तक का समय लग जाता है। चित्रकारी के साथ-साथ खेलों में रुचि रखने वाले डॉ. अग्निहोत्री का पसंदीदा खेल हॉकी है, जिसके लिये उन्होंने राज्य स्तर पर कई पुरस्कार भी प्राप्त किये हैं।
पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा, स्व. प्रधानमंत्री राजीव गांधी और राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर से अपने चित्रों के लिए सम्मान प्राप्त कर चुके डॉ. विष्णु अग्निहोत्री को सामान्य जन-जीवन एवं प्राकृतिक सुंदरता को कैनवास में उकेरना बहुत पसंद है। कुछ चित्रों को जहां डॉ. अग्निहोत्री ने तूलिका से संवारा है, तो वहीं कुछ चित्रों में उन्होंने चाकू के माध्यम से नाइफ पेंटिंग के द्वारा रंग भरे हैं। डॉ. अग्निहोत्री का मानना है कि चित्रों से लोगों का गहरा नाता होता है, वह लोगों के दिल को छूते हैं।अवसर था रोटरी क्लब, रॉक सिटी एवं इंटर नेशनल डिस्ट्रिक-३२६० के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सामूहिक चित्रकला प्रदर्शनी का। प्रदर्शनी में चित्रकार डॉ. एके अग्निहोत्री, डॉ. विष्णु अग्निहोत्री एवं संगीता विश्वकर्मा के चित्र प्रदर्शन हेतु रख गए हैं।
दो दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन इन्कम टैक्स कमिश्नर पीसीके सालोमन ने रिबन काटकर एवं दीप प्रज्जवलन कर किया। इस अवसर पर श्री सालोमन ने प्रदर्शनी में रखे चित्रों की तारीफ करते हुए कहा कि हिन्दुस्तान के कोने-कोने में इन चित्रकारों की कला को पहुंचाया जाना चाहिए और आयोजकों द्वारा किये गए इस प्रयास के लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं।
ममत्व से अभिशप्त तक
गोद में बच्चे को लिए काम की तलाश में घूमती मजदूर महिला, आकाश में अपनी प्रेमिका की छवि को तलाशता अनाम प्रेमी, भूली-बिसरी यादों में खोयी युवती, आदिवासी क्षेत्र का एक गरीब किसान, आतंक से डरी हुई निगाहें, जैसे कई मानवीय संवेदनाओं के साथ कई महान हस्तियों के स्क्रेच डॉ. एके अग्निहोत्री द्वारा प्रदर्शनी में रखे गये चित्रों में शामिल थे। प्रदर्शनी में डॉ. अग्निहोत्री द्वारा बनाये गये लगभग ३५ चित्र प्रदर्शन हेतु रखे गये

2 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लागजगत में आपका स्वागत है. शुभकामना है कि आपका ये प्रयास सफलता के नित नये कीर्तिमान स्थापित करे । धन्यवाद...

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